ऐक्यं बलं समाजस्य तद्भावे स दुर्बलः ।
तस्मात् ऐक्यं प्रशंसन्ति दृष्टं राष्ट्र हितैशिनः ॥
लेखक - राजकुमार बरूआ भोपाल
हम भारतीय अपने सभी तीज-त्यौहार और परंपराओं के कारण पूरे विश्व में अपनी एक अलग पहचान रखते हैं ।
पूरा विश्व हम भारतीयों को हमारी संस्कृति और परंपरा के कारण ही सम्मान और अपनेपन से देखता है।
वर्तमान समय में भारतीय संस्कृति का अधिक प्रचार और प्रसार हुआ है। आधुनिकता के इस दौर में पूरा विश्व मानों आपके द्वार पर खड़ा हो, इंटरनेट के माध्यम से हम बहुत जल्दी ही किसी भी विषय की जानकारी पा लेते हैं, और इस कारण हमारी उत्सुकता भी अब बढ़ गई है। वर्तमान समय में दुनिया के किसी भी देश का कोई व्यक्ति भारत आता है, तो पहले की अपेक्षा वह अब हमारी परंपरा और संस्कृति को जानने के लिए ज्यादा उत्सुक दिखता है, हमारे मंदिरों और हमारी नदियों के घाटों पर जाकर उसको महसूस कर अपना रहा हैं। हमारी संस्कृति का विश्व के अधिकतर देशों के लोग उसका अनुसरण कर रहे हैं। और हम भारतीयों की सहजता सरलता और शांति से जीवन जीने की कला को सीख कर शांति का अनुभव कर रहे हैं।
हमारे उत्सव हम भारतीयों में जोश उमंग उत्साह का संचार करते हैं, एक दूसरे के प्रति अपनेपन का आदान-प्रदान कर अपनी सामाजिक जड़ों को और मजबूती देते हैं।
सन् 1893 में जब अंग्रेजी हुकूमत ने भारतीयों के सामाजिक-सांस्कृतिक आयोजनों पर रोक लगा दी थी, तब लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जी ने गणेश उत्सव को जन जागरण का माध्यम बनाया।
उनका उद्देश्य स्पष्ट था, धार्मिक आस्था के माध्यम से सामाजिक एकता और स्वतंत्रता की चेतन को बल देना। आज हम गणेश उत्सव का जो स्वरूप देखते हैं, उसका उद्देश्य वही है कि हम सब भारतीयों में एकता और मजबूत हो, और हम वर्तमान समय की चुनौतियों का मिलजुल कर सामना कर सकें,
गणेश उत्सव का महत्व वर्तमान समय में और बढ़ गया है, आज की भागती-दौड़ती जिंदगी में अपने लिए कुछ समय निकालना मुश्किल हो गया है, पर हमारे सामाजिक उत्सव हमें एहसास दिलाते हैं कि हम सामाजिक प्राणी है, और समाज की रचना के अनुसार सभी को मिलजुल कर एक दूसरे के तीज-त्योहारों में साथ रहकर उसे उत्साह उमंग और अपनेपन के साथ मनाना है, और हमारे सामाजिक ताने-बाने को और मजबूत करना है।
दस दिवसीय गणेश उत्सव हमें अनेकों प्रकार से अपने आप को महसूस करने, अपने लोगों के और करीब जाने और अपनी परंपराओं को अधिक से अधिक मजबूत करने के लिए प्रेरित करता है।
गणेश उत्सव में अब तो लगभग हर कॉलोनी में गणेश जी की झांकी सजाकर उसमें भगवान गणेश जी की स्थापना की जाती है, ऐसा लगता है मानो पुरी कॉलोनी ही एक परिवार हो गई हो, सभी लोग अपने-अपने घरों से निकालकर समय का ध्यान रख झांकी स्थल पर पहुंचकर भगवान की भक्ति के साथ ही अपनी सामाजिक एकता को और मजबूत करते हैं, प्रत्येक झांकी पर आरती के समय सामाजिक समरसता का जो दृश्य देखने को मिलता है उसकी कल्पना ही हमारे महापुरुषों की भावना थी। और उस सुंदर दृश्य को देखकर ऐसा लगता है मानो हम सब में एक ही रक्त बह रहा हो, और वह रक्त है हमारी भारतीयता का।
मोहल्लों में झांकियों पर छोटे-छोटे बच्चे सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन कर, अपनी प्रतिभा का निखार करते हैं, और भविष्य में बड़े आयोजनों में जाने की जो उनकी इच्छा है वह इन छोटी-छोटी झांकियों के माध्यम से ही पूरी होती है।
गणेश उत्सव एक धार्मिक नहीं, सांस्कृतिक उत्सव है। आज गणेश उत्सव केवल एक धर्म पर्व की नहीं बल्कि कला, संगीत, साहित्य, समाजसेवा और सामूहिक चेतना का उत्सव बन चुका है।
गणेश उत्सव में भंडारों का भी आयोजन किया जाता है, इस आयोजन से हमारी सामाजिक एकता को जो बल मिलता है, वही हम भारतीयों की एकता की जड़ों को और मजबूती प्रदान करती है। हम सभी एक साथ बैठकर भोजन करते हैं जिससे हम सब में अपनेपन की भावना और प्रबल होती है।
गणेश उत्सव हमें अपने लोगों के और करीब जाने का अवसर प्रदान करता है ।
हम भारतीयों का व्यापार भी हमारे उत्सवों से ही जुड़ा है और इन उत्सवों के दौरान बाजारों में जो रौनक होती है, वही रौनक व्यापारियों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करती है। इसलिए हम सभी को अपने स्थानीय बाजारों में जाकर अपने व्यापारिक भाइयों से सामान खरीदना चाहिए, जिससे हमारे द्वारा दिया गया पैसा हमारे लोगों के ही काम आए और हमारी परंपराओं के लिए जो लोग व्यापार के माध्यम से हमसे जुड़े हुए हैं, उन्हें इसका लाभ मिल सके। स्थानीय बाजारों की रौनक ही हमें साल भर हर सामान उपलब्ध कराने के साथ ही व्यापारियों से हमारे ताल्लुकात को भी मजबूती प्रदान करती है ।
इसलिए अधिक से अधिक स्थानीय बाजारों में जाकर आप अपनी खरीदारी करें, और जहां तक हो सके ऑनलाइन व्यापार से बचे ।
एकता और भाईचारे की भावना ही
समाज के सभी वर्गों, जातियों, धर्मों और संस्कृतियों को मिलकर रहने और एक-दूसरे का सहयोग करने के लिए प्रेरित करता है, सभी व्यक्तियों और समूहों को हृदय से अपनाना, उन्हें बराबर मानना और समाज में एकता व भाईचारे की भावना को बढ़ावा देना। यह विभिन्नता के बावजूद सभी को एक सूत्र में पिरोकर एकजुट करने और समाज के दुर्बल वर्गों को मुख्यधारा में लाने का एक प्रयास भी है गणेश उत्सव।
तो लिए हम सब मिलकर इस गणेश उत्सव में विघ्नहर्ता श्री गणेश भगवान से कामना करें कि वह हम सब भारतीयों में एकता की भावनाओं को और मजबूती प्रदान कर, अपने लोगों से जोड़कर रखें। और हमारी राष्ट्रीयता की भावना को मजबूती प्रदान कर हमें अपना आशीर्वाद दें।
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