मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी द्वारा गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में "जश्न ए जम्हूरियत : मुशायरा आयोजित

 



मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी, संस्कृति परिषद, संस्कृति विभाग द्वारा गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में "जश्न ए जम्हूरियत मुशायरा 29 जनवरी 2025 को शाम 6:30 बजे राज्य संग्रहालय सभागार, श्यामला हिल्स, भोपाल में  आयोजित किया गया।आयोजित मुशायरे में देश भर से ख्याति प्राप्त शायरों ने उपस्थित होकर अपना कलाम पेश किया। 




अकादमी की निदेशक डॉ नुसरत मेहदी ने कार्यक्रम के प्रारम्भ में सभी शायरों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी द्वारा "जश्ने जम्हूरियत मुशायरा" के आयोजन का उद्देश्य देशभक्ति और लोकतंत्र की मूल्यों के महत्व को महसूस करना है और यह संदेश भी देना है कि देशभक्ति केवल एक भावना नहीं, बल्कि एक निरंतर प्रक्रिया है, जिसमें प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह राष्ट्रहित के लिए अपने विचार और कर्मों को समर्पित करे। उर्दू शायरी भी ऐसी भावनाओं को व्यक्त करने का सशक्त एवं प्रभावशाली माध्यम है। 

प्रख्यात शायर एवं साहित्यकार प्रो. शहपर रसूल की अध्यक्षता में आयोजित मुशायरे में देश भर से उपस्थित होने वाले जिन शायरों ने अपना कलाम पेश करेंगे उनके नाम और कलाम इस प्रकार हैं।




प्रो. शहपर रसूल 

न शायरी की हवस है न फ़िक्रे शोहरत-ओ-नाम

सो हमने सोचा बहुत है मगर कहा कम है I



डॉ. अंजुम बाराबंकवी

मेरे सर का ताज है हिन्दोस्तान

फ़ख़्र है अंजुम यहाँ की धूल पर



हिना रिज़वी हैदर 

इश्क़ नादानों का है खेल, हमीं कहते थे

और फिर हमने ही इक रोज़ ये नादानी की 





क़ाज़ी मलिक नवेद

झुक झुक के सलामी दे मग़रूर समन्दर भी 

दरिया भी क़दम चूमे क़तरा हो तो ऐसा हो 




नफ़ीसा सुल्ताना अना 

मख़्मूर हवाएँ हैं फ़क़त मेरे वतन की

लब पर भी दुआएँ हैं फ़क़त मेरे वतन की 




आशु मिश्रा 

सूखते पेड़ से पंछी का जुदा हो जाना 

ख़ुद-परस्ती नहीं एहसान फ़रामोशी है 




चराग़ शर्मा 

नज़रें मिलीं तो बात नहीं कर‌ सकूँगा मैं

दो काम एक साथ नहीं कर सकूँगा मैं




शादाब आज़मी 

ये दुनिया है यहाँ बैठे बिठाए कुछ नहीं होता 

जो तूफ़ानों से लड़ता है उसी का नाम होता है 


ग़ौसिया ख़ान सबीन

लब पर ख़ुदा का नाम हो दिल में वतन का दर्द

निकले बदन से रूह मेरी इस अदा के साथ 




संदीप श्रीवास्तव 

हम ऐसी नस्ल के पौधे जो सब्ज़ रहने को

शजर बने न बने फल बनाने लगते हैं


मुशायरे का संचालन चराग़ शर्मा द्वारा किया गया। 

कार्यक्रम के अंत में डॉ नुसरत मेहदी ने सभी श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।

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