विश्व को एक सूत्र में पिरोने वाला गीत है वंदे मातरम : विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर

 देश भक्ति का बीजमंत्र है वंदे मातरम - मुक्तिबोध

अरविंद का भारत और वंदे मातरम एक विमर्श व्याख्यानमाला का शुभारंभ


 हमारा गौरव, हमारा अभिमान राष्ट्र गीत वंदे मातरम् न सिर्फ भारत को वरन पूरी दुनिया को एक सूत्र में और सही दिशा में ले जाने की भावना से लिखा गया गीत है। इसे सिर्फ गीत कहना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि हमारी सामाजिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत का भी पर्याय है जो हमेें, हमेशा याद दिलाता रहेगा कि हमें किस पथ पर क्या करना चाहिए ?



यह विचार मंगलवार को अरविंद सोसायटी, शाखा भोपाल के दिव्यांश रजत जयंती समारोह में विधानसभा के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर से व्यक्त किए। विधानसभा अध्यक्ष तोमर ने कहा कि यह गीत आज भी प्रासंगिक है और हमें आगे बढ़ने और राष्ट्र हित में लगातार प्रयत्न करने की प्रेरणा देता है। रजत जयंती समारोह में अरविंद का भारत और वंदे मातरम् विषय पर आयोजित विमर्श के दौरान अरविंद की व्याख्या करते हुए कहा वे आध्यात्मिक पुरुष ही नहीं कर्मयोगी भी थे। उन्होंने कहा कि अरविंद का विचार था कि सिर्फ स्वतंत्रता भारत के लिए पर्याप्त नहीं होगी, हमें तो पूर्ण स्वराज चाहिए। इसी अवधारणा को लेकर आज देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी वंदे मातरम के माध्यम से देश में पूर्ण स्वराज की स्थापना का उद्घोष कर रहे हैं। इससे पहले विधानसभा अध्यक्ष तोमर ने कहा किईश्वर ने बंकिम बाबू को वंदे मातरम लिखने की प्रेरणा दी और उसी अनुकंपा को आगे बढ़ाते हुए महर्षि अरविंद को भी अग्रसर किया।

विधानसभा अध्यक्ष तोमर ने कहा कि अतीत में वंदे मातरम पर आपत्ति का विरोध जोरदार ढंग से नहीं किया गया। जोरदार विरोध किया होता तो गीत का विभाजन नहीं होता और भारत का विभाजन भी नहीं होता। विधानसभा अध्यक्ष तोमर ने संकल्प लेने का आव्हान करते हुए कहा कि जब तक पूर्ण वंदे मातरम साकार नहीं होगा कोई भी चेैन से नहीं बैठेगा।
 

समारोह के अध्यक्षता कर रहे राष्ट्रीय स्वयं संघ के क्षेत्र सह कार्यवाह हेमंत मुक्तिबोध ने अपने  सारस्वत  उद्बोधन में आत्हान किया कि हमें वंदे मातरम को साकार रूप में अंगीकार करना होगा। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम का एक ही भाव है व्यक्ति के विचार, दृष्टि और कार्य समान होना चाहिए। वंदे मातरम ने करोड़ों लोगों में राष्ट्र वंदना की अलख जगाई। गीत में राष्ट्र भक्ति और अध्यात्म का अदभुत संगम है। गीत ने शताब्दी की दास्ता के खिलाफ जागरण का काम किया। यह गीत अतीत की स्मृति ही नहीं जगाता , बल्कि उज्जवल भविष्य का उद्घोष भी करता है।



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