नाबार्ड, मध्य प्रदेश क्षेत्रीय कार्यालय, भोपाल द्वारा ओजस्विनी महोत्सव 2025 की साझेदारी मे आयोजित राष्ट्र स्तरीय प्रदर्शनी सह बिक्री मेले का आयोजन दिनांक 07 से 16 अक्टूबर 2025 के दौरान किया जा रहा है। इस प्रदर्शनी सह बिक्री का शुभारंभ महामहीम राज्यपाल, मध्य प्रदेश मंगू भाई पटेल जी के द्वारा दिनांक 08 अक्टूबर 2025 को किया गया। स्वयं सहायता समूहों विशेषकर महिला स्वयं सहायता समूहों, कृषक उत्पादक संगठनों (एफ़पीओ) और गैर कृषि क्षेत्र से संबन्धित उत्पादक संगठनों के सदस्यों व कारीगरों के उत्कृष्ट उत्पाद इस प्रदर्शनी में बिक्री के लिए उपलब्ध रहेंगे। इस अवसर पर नाबार्ड, मध्य प्रदेश क्षेत्रीय कार्यालय ने ओजस्विनी समूह के साथ साझेदारी कर एक शुभारंभ कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में महामहिम राज्यपाल, मध्यप्रदेश मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। उनके साथ ही साथ भारतीय रिज़र्व बैंक भारतीय स्टेट बैंक के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।
अपने उद्घाटन संबोधन में सी सरस्वती, मुख्य महाप्रबंधक, नाबार्ड, मध्यप्रदेश क्षेत्रीय कार्यालय ने मंचासीन सभी सदस्यों का अभिवादन किया एवं पुष्पगुच्छ व उप वस्त्रों के साथ उनका स्वागत किया। स्वयं सहायता समूहों, कृषक उत्पादक संगठनों तथा गैर कृषि क्षेत्र से जुड़े उत्पादक संगठनों के उत्कृष्ट उत्पादों की भोपाल वासियों के लिए दिवाली के अवसर पर उचित उपलब्धता की चर्चा की। इस अवसर पर मुख्य महाप्रबंधक नाबार्ड ने अपने संबोधन में कहा कि आज का युग उद्यमिता, नवाचार और प्रौद्योगिकी के साथ आगे बढ़ने का है। इसी को ध्यान में रखते हुए नाबार्ड द्वारा हमारे किसानों व कारीगरों के उत्पादों की मार्केटिंग में विशेष सहयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा उत्पाद तैयार करना जितना महत्वपूर्ण है उतना ही महत्वपूर्ण उसकी मार्केटिंग का भी है। उत्पाद तैयार करने में भी नाबार्ड किसानों एवं कारीगरों को प्रशिक्षण के माध्यम से सहायता कर रहा है एवं बाज़ार की उपलब्धता के अवसर प्रदान करने के लिए इस प्रकार के आयोजन भी नाबार्ड करता रहता है। वर्ष 2018 से लगातार नाबार्ड भोपाल ऐसी प्रदर्शनियों के आयोजन कर रहा है जिसमें देशभर से कुशल कारीगर अपने उत्कृष्टतम उत्पाद लेकर भोपाल वासियों के लिए पहुंचते हैं और भोपालवासी इन उत्पादों का लाभ उठाते हैं। इस प्रदर्शनी सह बिक्री मेले में नाबार्ड द्वारा संवर्धित 100 से अधिक संगठन पूरे देश भर से आए हैं। नाबार्ड के द्वारा किए जा रहे प्रयासों के विषय में बताते हुए मुख्य महाप्रबंधक ने कहा कि मध्यप्रदेश में नाबार्ड के सहयोग से कुल 22 उत्पादों को जीआई प्रमाणन में सहयोग किया जा रहा है। नाबार्ड अपने द्वारा प्रशिक्षित ग्रामीण महिला समूहों/ कृषक उत्पादक संगठनों को उनके द्वारा तैयार उत्पादों की बिक्री के लिए कई प्लैटफ़ार्म भी उपलब्ध कराता है जैसे ‘रूरल मार्ट’ (Rural Mart), “मोबाईल रूरल मार्ट (Mobile Rural Mart ) और “रूरल हाट” (Rural Haat) आदि ताकि ये लोग अपनी आजीविका को सुदृढ़ कर सके। इस आयोजन के 05 उद्देश्यों यथा 01. ग्रामीण उध्यमिता को बढ़ावा देना, 02. बाजार संपर्क 03. महिलाओ और किसानो का सशक्तिकरण 04. स्थानीय और स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहित करना 05. वित्तीय समावेशन और जागरूकता के विषय में लोगों को जागरूक किया।
सुधा मलैया, अध्यक्षा, ओजस्विनी समदर्शी एवं न्यास संस्थान ने अपने संबोधन में ओजस्विनी महोत्सव की यात्रा के विषय में बताया जो वर्ष 2004 से जारी है। महिलाओं को समर्पित यह संस्था गत 22 वर्षों से भोपाल शहरवासियों को स्वदेशी उत्पादों की ओर ले जाने में प्रयासरत हैं। उन्होंने कहा कि देशभर से स्वयं सहायता समूह की महिलाएं व उद्यमी समूह इस मेले में आए हैं। दिवाली से पहले यह मेला आयोजित हो रहा है। अतः उन्होंने यह आशा ज़ाहिर की कि शहरवासियों को उचित मूल्य पर उत्कृष्ट उत्पाद मिलेंगे जो स्वदेशी होंगे और भारत को आत्मनिर्भर बनाने की तरफ़ अग्रसर करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि देश की अर्थव्यवस्था सुदृढ़ करने के लिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सुदृढ़ होना अत्यंत आवश्यक है और इस प्रकार के आयोजन इस सपने को साकार करने की तरफ एक महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्य महा प्रबंधक, भारतीय स्टेट बैंक, प्रकाश कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि स्वयं सहायता समूह ग्रामीण अर्थव्यवस्था में साइलेंट रेवोल्यूशन की तरह काम कर रहा है। यह संगठन ग्रामीण उद्यमिता का ध्वजवाहक हैं। यह महिलाओं की आत्मविश्वास का परिचायक है। नाबार्ड के द्वारा दी जा रही नियमित ट्रेनिंग से ये स्वयं सहायता समूह और कृषक उत्पादक संगठन ग्रामीण अर्थव्यवस्था में क्रांतिकारी परिवर्तन ला रहे हैं। भारतीय स्टेट बैंक ने अपने स्तर पर 14,000 से अधिक स्वयं सहायता समूहों का समर्थन किया है और उन्हें ऋण प्रदान कर सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण योगदान किया है। भारतीय स्टेट बैंक हर अच्छे विचार को वित्तपोषित करने के लिए समर्पित है। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूह बैंक लिंकेज कार्यक्रम आज दुनिया का सबसे बड़ा सूक्ष्म वित्त कार्यक्रम बन गया है।
भारतीय रिज़र्व बैंक की क्षेत्रीय निदेशक रेखा चंदनावेली ने वर्ष 2018 से इस प्रकार के आयोजन करने के लिये नाबार्ड को बधाइयां दी नाबार्ड के इस प्रयास की सराहना की। दी। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूह, कृषक उत्पादक संगठन और गैर कृषक उत्पादक संगठनों के उत्पादों की मार्केटिंग एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है। नाबार्ड के सहयोग से यह संभव हो पाया है। राज्यपाल महोदय की उपस्थिति इस आयोजन को भव्य बना रहा है। आरबीआइ के योगदान के विषय में बात करते हुए उन्होंने कहा की प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र और वित्तीय समावेशन में भारतीय रिज़र्व बैंक ने कई नवोन्मेषी कार्य किए हैं।
महामहिम राज्यपाल महोदय ने नाबार्ड के द्वारा आयोजित स्वयं सहायता समूह हस्तशिल्प और कृषक उत्पादक संगठनों के इस कार्यक्रम में शामिल होकर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा के स्टालों के भ्रमण के दौरान उन्होंने कई स्वयं सहायता समूह के सदस्यों से बातचीत की। इस दौरान समूहों के सदस्यों की बातें जानकार वे अत्यंत प्रसन्न हुए की इस प्रकार के मेले उनकी आर्थिक तरक्की में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा की ऐसे आयोजन इन सदस्यों की आर्थिक निर्भरता के लिए महत्वपूर्ण है। ग्रामीण महिला समूहों के उत्पादों की बिक्री के लिए उचित प्लेटफार्म उपलब्ध करवाना अत्यंत सराहनीय कार्य है जिसके लिए नाबार्ड बधाई का पात्र है । ग्रामीण क्षेत्र में कृषि कुटीर हस्तशिल्प आदि क्षेत्रों में नाबार्ड के योगदान की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि भारत माता गांवों में निवास करती है और गांव भारत माता की आत्मा के समान है। यदि आत्मा मजबूत होगी तो शरीर अवश्य मजबूत होगा। भारत को विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने के लिए माननीय प्रधानमंत्री के आह्वान में यह एक महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने पत्रकारों से इस कार्यक्रम का भरपूर प्रचार प्रसार करने का अनुरोध किया। नाबार्ड को धन्यवाद किया कि जो बेटियां पहले घरों में बंद रहती थी बाहर निकलने से डरती थी इन कार्यक्रमों माध्यम से उन्हें जुबान मिल रही है। जब यह समूह की महिलाएं अपने परिवार के आय अर्जन का साधन बन गई है तो घर में भी माहौल बेहतर हो गया है। बेटी बचाओ -बेटी पढ़ाओ से लेकर महिला सशक्तिकरण के इस पड़ाव पर नाबार्ड का सहयोग सराहनीय है।
यह आयोजन दिनांक 16 अक्टूबर 2025 तक चलेगा इसमें सभी शहरवासी अधिक संख्या में पधारे और दिवाली की शॉपिंग इस मेले से करें इससे आपके घरों में ग्रामीण संस्कृति के साथ साथ स्वदेशी उत्पाद पहुँचेंगे और आप भारतीय अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने में अपना योगदान दे सकेंगे। इसी आह्वान के साथ यह कार्यक्रम संपन्न हुआ।
जीआई उत्पाद एक और मुख्य आकर्षण है, जिसमें मध्य प्रदेश के विशिष्ट भौगोलिक चिह्नों को प्रदर्शित किया गया है, जैसे कि वारासिवनी की हैंडलूम साड़ियाँ , उज्जैन से बटिक प्रिंट, मंडला से गोंड पेंटिंग ,जबलपुर से संगमरमर पत्थर के हस्तशिल्प उत्पाद आदि।। इस अवसर पर नाबार्ड के स्टाफ सदस्यों के साथ साथ अन्य बैंको के प्रतिनिधिगण राज्य सरकार के अधिकारीगण एवं स्वयं सहायता समूह के सदस्य गण उपस्थित थे।




