मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी, संस्कृति परिषद, संस्कृति विभाग के तत्त्वावधान में ज़िला अदब गोशा, खंडवा के द्वारा सिलसिला एवं तलाशे जौहर के तहत खंडवा के प्रसिद्घ शायरों डॉ. सफ़दर रज़ा खंडवी एवं सिकंदर हमीद इरफ़ान को समर्पित स्मृति प्रसंग एवं रचना पाठ का आयोजन 31 अगस्त, 2025 को वनमाली सृजन पीठ सभागृह, आईसेक्ट कैम्पस, खंडवा में ज़िला समन्वयक सुफ़ियान क़ाज़ी के सहयोग से किया गया।
उर्दू अकादमी की निदेशक डॉ. नुसरत मेहदी ने कार्यक्रम की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी द्वारा खंडवा में आयोजित 'सिलसिला" और "तलाशे जौहर" संगोष्ठी उस्ताद शायरों डॉ. सफ़दर रज़ा खंडवी और सिकंदर हमीद इरफ़ान को समर्पित एक सार्थक श्रद्धांजलि है। "तलाशे जौहर" प्रतियोगिता के माध्यम से हम नई प्रतिभाओं को मंच देकर उर्दू साहित्य के उज्ज्वल भविष्य को तैयार करने के प्रयास में भी हैं। अकादमी का उद्देश्य यही है कि वरिष्ठ रचनाकारों की स्मृति को सम्मान मिले और नई पीढ़ी को सृजन का अवसर।
खंडवा ज़िले के समन्वयक सुफ़ियान क़ाज़ी ने बताया कि स्मृति एवं रचना पाठ दो सत्रों पर आधारित था। प्रथम सत्र में दोपहर 1:00 बजे तलाशे जौहर प्रतियोगिता आयोजित की गई जिसमें ज़िले के नये रचनाकारों ने तात्कालिक लेखन प्रतियोगिता में भाग लिया। निर्णायक के रूप में बुरहानपुर के वरिष्ठ शायर ताज मोहम्मद ताज एवं धार के प्रसिद्ध शायर क़मर साक़ी मौजूद रहे जिन्होंने प्रतिभागियों शेर कहने के लिए दो तरही मिसरे दिये। दिये गये मिसरों पर नए रचनाकारों द्वारा कही गई ग़ज़लों पर एवं उनकी प्रस्तुति के आधार पर सोहेल शाद ने प्रथम, मोहसिन हसन ने द्वित्तीय एवं शफीक़ सादिक़ ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले तीनों विजेता रचनाकारों को उर्दू अकादमी द्वारा पुरस्कार राशि क्रमशः 3000/-, 2000/- और 1000/- एवं प्रमाण पत्र दिए जाएंगे।
दूसरे सत्र में दोपहर 3:00 बजे सिलसिला के तहत स्मृति प्रसंग एवं रचना पाठ का आयोजन हुआ जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार एवं कुलपति सी वी रमन विश्विद्यालय, खंडवा डाॅ. अरुण जोशी ने की। वहीं विशिष्ट अतिथियों के रूप में शरद जैन, कैलाश मंडलेकर मंच पर उपस्थित रहे। इस सत्र के प्रारंभ में प्रसिद्घ उस्ताद शायरों सफ़दर रज़ा खंडवी एवं सिकंदर हमीद इरफ़ान के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर ताज मोहम्मद ताज एवं यास्मीन शहजाद ने चर्चा कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
यास्मीन शहज़ाद ने कहा कि डॉ. सफ़दर रज़ा को गद्य और पद्य दोनों में महारत हासिल थी। जहाँ एक ओर उनकां काव्य संग्रह मोजों का सफ़र 1981 में मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी की आर्थिक सहायता से प्रकाशित हुई, वहीं गद्य में उनकी बहुमूल्य कृति उर्दू अदब की तरक़्क़ी में निमाड़ का हिस्सा प्रशंसनीय है। उक्त पुस्तक के माध्यम से निमाड़ के साथ-साथ बुरहानपुर के साहित्यिक इतिहास का न केवल एक अध्याय उजागर हुआ है, बल्कि पूरे निमाड़ क्षेत्र की ढाई हज़ार वर्षों की सभ्यता और संस्कृति को समझने में भी सहायता मिली है।
वहीं ताज मोहम्मद ताज ने कहा कि सिकंदर इरफ़ान खंडवी ने अपनी विद्वतापूर्ण और साहित्यिक प्रतिभा के माध्यम से जीवन के पन्नों पर इतने सुंदर रंग बिखेरे हैं, जो उनके व्यक्तित्व को अद्वितीय और विशिष्ट बनाते हैं। सिकंदर इरफ़ान की सभी रचनाओं में उनका काव्य संग्रह ज़ख्मी आवाज़, कहानी संग्रह चीख़ती ख़ामोशी के अलावा बच्चों के साहित्य पर विभिन्न पुस्तकों में बच्चों की कहानियाँ अंगन फूलों का, बिखरे मोती, बच्चों की कविताएँ, और सिमटते दायरे उल्लेखनीय हैं।
रचना पाठ में जिन शायरों ने अपना कलाम पेश किया उनके नाम और अशआर निम्न हैं :
हमारी बात फ़ीकी है तुम्हारी शान के आगे
क़सीदा तुम नमकख्वारो से लिखवा लो तो अच्छा है
डॉ हबीब राहत हुबाब
अपने बेटे को मत कहो सूरज
सर चढ़ेगा तो क़द घटा देगा
सग़ीर मंज़र
किसी की आंखों स्व गहरा लगाव क़ायम है
चढ़ाई पर भी नदी का बहाव क़ायम है
तुम्हारे रूप पे तनक़ीद क्या करे शाहिद
तुम्हारे रंग से सोने का भाव क़ायम है
ज़हूर शाहिद
मुझको पास बुला लेना था,
मन की गांठ खुला लेना था।
मैं गीतों की गंगा लाता,
थोड़ा मुझे रुला लेना था।
: गोविंद गुंजन
क़तरा क़तरा रहना क्या
दरिया दरिया बहना क्या
सोना चांदी हीरे मोती
लाज नहीं तो गहना क्या
हारून फ़िराक़
