राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के निर्देषानुसार एवं राजीव कुमार अयाची, प्रधान जिला न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, भिण्ड के आदेशानुसार तथा हिमांशु कौशल, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, भिण्ड एवं नेहा उपाध्याय, प्रिंसिपल मजिस्टेªट, किशोर न्याय बोर्ड भिण्ड की अध्यक्षता में ए.डी.आर. सेंटर भिण्ड में उच्चतम न्यायालय द्वारा संदर्भित निर्णय में पारित दिशा-निर्देशों के पालन में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
उक्त कार्यक्रम में नेहा उपाध्याय, प्रिंसिपल मजिस्टेªट, किशोर न्याय बोर्ड द्वारा किशोर न्याय अधिनियम के संबंध में नालसा द्वारा तैयार मोड्यूल के अनुसार विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत रूप से जानकारी प्रदाय की गई। उक्त संबंध में समझया गया कि ऐसे पुलिस अधिकारी जोकि ‘विशेष किशोर पुलिस इकाई’ में कार्य करते हैं, उन्हें देखरेख और संरक्षण के जरूरतमंद बच्चों के मामले में सामाजिक कार्यकर्ता से समन्वय करना चाहिए एवं बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत करना चाहिए तथा जैसे ही कानून का उल्लंघन करने वाला बच्चा हिरासत में लिया जाता है तो बाल कल्याण पुलिस अधिकारी या विशेष पुलिस इकाई को उसे 24 घण्टे के अंदर किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत करना चाहिए एवं बच्चे के माता-पिता को सूचित करना चाहिए। किसी भी बच्चे की उम्र निर्धारण के लिए बोर्ड को बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल में प्रवेश लेते समय स्कूल का रजिस्टर में अंकित वर्ष एवं चिकित्सा विशेषज्ञों से भी बच्चे की उम्र के बारें में साक्ष्य ले सकता है। विशेष किशोर पुलिस इकाई बच्चों को कानूनी सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के साथ भी समन्वय रख सकती है। इसके अतिरिक्त इस बात पर जो दें कि अधिकांश मामलों में देखरेख और संरक्षण के जरूरतमंद बच्चे के संपर्क में राज्य की ओर से पुलिस की सबसे पहले आती है, इसलिए बच्चे का भविष्य निर्धारित होने में पुलिस का पहला कदम बहुत महत्वपूर्ण हो सकता हैं।
उक्त कार्यक्रम में सौरभ कुमार दुबे, जिला विधिक सहायता अधिकारी भिण्ड एवं विशेष पुलिस इकाई से संबंधित पुलिसकर्मी उपस्थित रहें।
