वाराणसी : महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य के मंचन का दूसरा दिन

मंत्री अनिल राजभर की उपस्थिति में हजारों दर्शकों ने महानाट्य का लिया आनंद

मध्यप्रदेश शासन संस्कृत विभाग द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से सम्राट विक्रमादित्य पर केंद्रित महानाट्य के मंचन के दूसरे दिन उत्तर प्रदेश के श्रम एवं सेवा नियोजन मंत्री अनिल राजभर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए। तीन दिवसीय महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य के मंचन के दूसरे दिन बाबा विश्वनाथ के हजारों भक्तोंकला रसिकोंकला प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों ने भरपूर आनंद लिया।

महानाट्य में कार्यक्रम स्थल पर एक साथ तीन विशाल एवं भव्य मंच तैयार किए गए थेजिन पर समानांतर विभिन्न दृश्य प्रस्तुत किए गए। इन मंचों के माध्यम से सम्राट विक्रमादित्य के बाल जीवनराजतिलकवीरतान्यायप्रियतासुशासन और विद्वानों के प्रति सम्मान जैसे प्रसंगों को जीवंत रूप में दिखाया गया। प्रकाशध्वनि और दृश्य परिवर्तन की आधुनिक तकनीक ने प्रस्तुति को और भी आकर्षक बना दिया।

महानाट्य में 200 से अधिक कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। 1.45 घंटे की इस प्रस्तुति ने सम्राट विक्रमादित्य के विभिन्न जन कल्याणकारी पहलुओं को दर्शकों के सामने रखा। मंच पर उज्जैन के महाकाल मंदिर की प्रतिकृति ने बाबा महाकाल के दर्शन कराएजो विशेष आकर्षण का केन्द्र था। मंच के सामने युद्ध के दृश्य में घोड़े दौड़ते हुए दिखाई दिए। मानो ऐसा लगा कि युद्ध प्रत्यक्ष में चल रहा हो और सम्राट विक्रमादित्य इस युद्ध में विजय प्राप्त कर रहे हैं। महानाट्य में 18 घोड़ें2 रथ4 ऊँट2 पालकी और 1 हाथी के साथ जीवंत दृश्य से सम्राट विक्रमादित्य के जीवन प्रसंगों को प्रस्तुत किया।

इस अवसर पर वाराणसी के महापौर अशोक तिवारीविधान परिषद सदस्य अश्विन त्यागीपूर्व विधायक जगदीश पटेलसतेंद्र कुमार एवं अन्य अतिथि सहभागी रहे। इसके पूर्व डॉ. राजेश कुशवाहापंडित नरेश शर्मामहानाट्य निर्देशक संजीव मालवीय एवं राजा भोज शोध प्रभाग के निदेशक संजय यादव द्वारा अतिथियों का अंग वस्त्रविक्रम पंचांग एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया।

मध्यप्रदेश के लोक कलाकारों की प्रस्तुतियाँ

महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य के मंचन से पहले मंच पर मध्यप्रदेश के लोक कलाकारों द्वारा पूर्वरंग प्रस्तुतियों में 150 से अधिक कलाकारों ने मध्यप्रदेश के लोक नृत्य जैसे मालवा की मटकीनिमाड़ का गणगौरडिंडोरी का गुदुमबाजासागर का बरेदी और उज्जैन के डमरू को प्रस्तुत किया। इसके पूर्व लोक कलाकारों ने लोक कला यात्रा के माध्यम से शहर में मध्यप्रदेश के सांस्कृतिक वैभव को प्रस्तुत किया।

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