लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की 300वीं जयंती को समर्पित मध्यप्रदेश की झाँकी ने कर्तव्य पथ पर बढ़ाई शोभा

 

नई दिल्ली गणतंत्र दिवस परेड 2026 में मध्यप्रदेश की झाँकी पुण्यश्लोका लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर’ ने कर्तव्य पथ पर अपनी भव्य और भावपूर्ण प्रस्तुति से देशवासियों का ध्यान आकर्षित किया। यह झाँकी लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की 300वीं जयंती को समर्पित रहीजिसमें उनके गौरवशाली व्यक्तित्वसुशासनआत्मनिर्भरतानारी सशक्तीकरण और सांस्कृतिक संरक्षण की विरासत को सशक्त रूप से प्रदर्शित किया गया।

भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने परेड की सलामी ली। इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदीकेंद्रीय मंत्रीमंडल के सदस्य और अन्य विशिष्ट अतिथि परेड के साक्षी बने।

झाँकी के अग्र भाग में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की चिर-परिचित प्रतिमा को दर्शाया गयाजिसमें वे हाथ में शिवलिंग धारण किए पद्मासन में विराजमान हैं। यह दृश्य भारतीय मातृशक्ति की सौम्यतागरिमा और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक है।

मध्य भाग में लोकमाता अहिल्याबाई अपने मंत्री-गण एवं सैनिकों के साथ प्रदर्शित हैंजो उनके सुदृढ़ प्रशासनन्यायप्रिय शासन व्यवस्था और लोककल्याणकारी दृष्टि को दर्शाता है। इसके निचले हिस्से में उनके शासनकाल में होलकर साम्राज्य द्वारा कराए गए मंदिरों के जीर्णोद्धार एवं निर्माण कार्यों का प्रभावशाली चित्रण किया गयाजहाँ एक सैनिक द्वारा पहरा देना सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा का संदेश देता है।

झाँकी के पश्च भाग में लोकमाता अहिल्याबाई की राजधानी महेश्वर के प्रसिद्ध घाटमंदिर और किले का भव्य दृश्य प्रस्तुत किया गया। पवित्र नर्मदा नदीघाटों और नौकाओं का मनोहारी अंकन झाँकी को आध्यात्मिक ऊँचाई प्रदान करता है। महेश्वर घाट स्थित मंदिरों के शिखर पृष्ठभूमि में दिखाई देते हैं। साथ ही भित्तिचित्रों में लोकमाता अहिल्याबाई के मार्गदर्शन में महिलाएँ महेश्वरी साड़ी की बुनाई करती हुई नजर आती हैंजो उनके शासनकाल में नारी सशक्तीकरणस्वदेशी उत्पादन और आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा का सशक्त प्रमाण है।

Post a Comment

Previous Post Next Post