“150वीं जयंती महोत्सव: बिरसा मुंडा व शिक्षक गौरव” में शामिल हुए दक्षिण पश्चिम विधायक भगवानदास सबनानी

 


आज मैं यहाँ आप सभी को भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती और शिक्षाविद गिजूभाई की जयंती के पावन अवसर पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देने आया हूँ। दुष्यंत संग्रहालय में आत्मनिर्भर शिक्षक संदर्भ समूह द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम हम सभी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक है।



1. भगवान बिरसा मुंडा का स्मरण और महत्व

भगवान बिरसा मुंडा जी सिर्फ एक आदिवासी प्रतिरोध सेनानी ही नहीं थे, बल्कि उन्होंने अपने संघर्ष और त्याग से यह संदेश दिया कि “जल, जंगल और जमीन” केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं हैं, बल्कि हमारी पहचान और अस्तित्व का आधार है।

आज, उनकी 150वीं जयंती पर, हमें यह याद करना चाहिए कि उनका जीवन हमें सिखाता है - आत्मसम्मान, आत्मनिर्भरता और एकता की शक्ति।

उनके आदर्श हम सब, और विशेष रूप से हमारे आदिवासी भाई-बहनों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उनका “उलगुलान” यह दिखाता है कि जब लोग अपनी जमीन और अधिकारों के लिए खड़े होते हैं, तो सामाजिक परिवर्तन में कितनी बड़ी ताकत होती है।


2. शिक्षाविद गिजूभाई के योगदान का सम्मान

शिक्षक, समाज का संवाहक और संस्कृति का निर्माता होता है। गिजूभाई जैसे शिक्षाविदों ने शिक्षा के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान दिया है और अनेक पीढ़ियों को शिक्षित कर समाज को आगे बढ़ाया है।

आज आत्मनिर्भर शिक्षक संदर्भ समूह के इस आयोजन के माध्यम से हम न सिर्फ उनकी जयंती मना रहे हैं, बल्कि यह संकल्प भी ले रहे हैं कि हम शिक्षक समुदाय के उत्थान, प्रतिस्पर्धा और आत्मनिर्भरता को और आगे बढ़ाएँगे।


3. आत्मनिर्भर शिक्षक संदर्भ समूह की भूमिका

यह समूह वास्तव में एक बहुत ही प्रेरणादायक पहल है - यह न सिर्फ शिक्षकों को सम्मान देता है, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता, शिक्षक सशक्तिकरण और शिक्षक-समुदाय के बीच सहयोग को बढ़ावा देता है।

मुझे यकीन है कि इस समूह के माध्यम से आगे आने वाली पीढ़ियाँ न केवल बेहतर शिक्षार्थी बनेगी, बल्कि वे देश की सेवा में, समाज निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।


4. विधायक के रूप में मेरा संदेश

एक विधायक होने के नाते, मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूँ कि शिक्षा मेरी प्राथमिकता है। मैं जनप्रतिनिधि के रूप में यह सुनिश्चित करने का प्रयास करूँगा कि हमारे क्षेत्र में शिक्षक-संबंधी नीतियाँ, संसाधन और संरचनाएँ और मजबूत हों।

मैं शिक्षक समुदाय के साथ मिलकर काम करना चाहता हूँ - आपके विचार, सुझाव और अनुभव हमारे विकास-योजना में बहुत मूल्यवान हैं।

मैं यह प्रतिबद्धता लेता हूँ कि शिक्षा को स्थानीय स्तर पर सशक्त बनाना, आदिवासी और पिछड़े समुदायों तक शिक्षा पहुंच को सुनिश्चित करना और शिक्षक-किसान संवाद को बढ़ावा देना मेरे लिए हमेशा प्राथमिकता होगी।


5. समापन और धन्यवाद

अंत में, मैं आत्मनिर्भर शिक्षक संदर्भ समूह, आयोजन समिति, दुष्यंत संग्रहालय और सभी सहभागी शिक्षकों और अतिथि गणों का दिल से आभार व्यक्त करता हूँ।


भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर हमें यह याद रखना चाहिए कि हमारा समाज विकास और सम्मान की दिशा में तभी आगे बढ़ सकता है जब हम अपनी जड़ों, अपनी सांस्कृतिक विरासत और शिक्षा को समान रूप से महत्व दें।


मैं आप सभी से अनुरोध करता हूँ कि आप इसी भावना को आगे बढ़ाएँ — शिक्षा, संस्कृति और सामुदायिक एकता।

धन्यवाद। जय किसान, जय शिक्षक, और जय आदिवासी गौरव!


Post a Comment

Previous Post Next Post