छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में सक्ती-कोरबा मार्ग पर, सक्ती से लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित दमउदहरा (दमाऊधारा) न केवल प्राकृतिक सौंदर्य का अनुपम स्थल है, बल्कि यह धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यहाँ तक सड़क मार्ग से निजी वाहन या टैक्सी द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है। निकटतम रेलवे स्टेशन सक्ति, जबकि निकटतम हवाई अड्डा रायपुर है।
धार्मिक दृष्टि से दमउदहरा अत्यंत पूजनीय है। यहाँ राम-जानकी मंदिर, राधा-कृष्ण मंदिर, ऋषभदेव जैन तीर्थंकर का मंदिर, हनुमान मंदिर, भगवान शिव-पार्वती मंदिर और विष्णु-लक्ष्मी मंदिर जैसे कई पवित्र स्थल स्थित हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम अपने वनवास काल में दमउदहरा (गूंजी क्षेत्र) पधारे थे। कहा जाता है कि उन्होंने यहाँ विश्राम और पूजा-अर्चना की थी, जिससे यह क्षेत्र ऋषभ तीर्थ के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
इतिहासकार लोचन प्रसाद पांडेय द्वारा खोजे गए ‘गूंजी शिलालेख’ का उल्लेख भी इस स्थल के महत्व को और बढ़ाता है। इस शिलालेख में उस समय की धार्मिक गतिविधियों, सामाजिक संरचना और स्थानीय शासन व्यवस्था का विवरण मिलता है, जो दमउदहरा क्षेत्र की प्राचीनता और समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा का प्रमाण है।
हर वर्ष जनवरी महीने में यहाँ भव्य मेला आयोजित होता है, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु और पर्यटक शामिल होते हैं। विशेष रूप से सूर्य ग्रहण के अवसर पर यहाँ स्नान और पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाता है। इस समय घाटी में साधु-संतों का संगम होता है। एक रोचक दृश्य यह भी देखा जाता है कि सूर्य ग्रहण समाप्त होते ही जंगली बंदर घाटी में उतर आते हैं, जो यहाँ की अनूठी प्राकृतिक घटना बन चुकी है।
दमउदहरा पिकनिक और पारिवारिक भ्रमण के लिए भी लोकप्रिय है। लोग यहाँ झरने के पास बैठकर, हरियाली के बीच विश्राम और मनोरंजन का आनंद लेते हैं। मानसून के दौरान झरने में स्नान का अनुभव अविस्मरणीय होता है।
प्रकृति, आस्था, इतिहास और रोमांच का यह संगम दमउदहरा को छत्तीसगढ़ का एक विशिष्ट पर्यटन स्थल बनाता है। यह न केवल श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है, बल्कि स्थानीय संस्कृति, परंपरा और अर्थव्यवस्था के विकास में भी इसकी अहम भूमिका है। यहाँ की आध्यात्मिक शांति और प्राकृतिक सौंदर्य हर आगंतुक को एक गहरे, आत्मिक अनुभव से भर देता है।

