राजधानी पेट्रोल पम्प पर खाद्य विभाग की बड़ी कार्रवाई, अतिरिक्त 528 लीटर पेट्रोल जब्त


भोपाल कलेक्टर के आदेश पर जिला आपूर्ति नियंत्रक चंद्रभान सिंह जादौन के मार्गदर्शन में खाद्य विभाग की टीम ने जहांगीराबाद स्थित राजधानी पेट्रोल पम्प (बीपीसीएल) पर बड़ी कार्रवाई की ।


कलेक्टर के संज्ञान के बाद हुई कार्रवाई

जब पूरा मामला भोपाल कलेक्टर के संज्ञान में आया तो उन्होंने जिला आपूर्ति नियंत्रक को कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद टीम ने मौके पर पहुँचकर जांच की और कार्रवाई को अंजाम दिया।

शिकायत पर हुई जांच

यह कार्रवाई उस समय की गई जब राजधानी पेट्रोल पम्प पर एक बाइक में उसकी क्षमता से अधिक पेट्रोल डाला गया, आपको बता दें शिकायतकर्ता द्वारा ये आरोप लगाया गया कि उसकी बाइक के टैंक की क्षमता केवल 10.5 लीटर की है लेकिन उसने राजधानी पेट्रोल पंप से पेट्रोल डलवाया तब उसकी बाइक में 16 लीटर पेट्रोल डाल भी दिया गया और उसे 16 लीटर पेट्रोल के पैसे भी लिए गए, इसके बाद शिकायत को संज्ञान में लेकर शिकायतकर्ता को मौके पर बुलाया उसके बयान दर्ज किया गया। इसके बाद पेट्रोल नोजल से प्रदाय की मात्रा की जाँच की गई और पम्प पर पेट्रोल-डीज़ल का भौतिक सत्यापन किया गया।

जांच के बाद 528 लीटर पेट्रोल ज़ब्त

सत्यापन में पाया गया कि पम्प पर 528 लीटर पेट्रोल का अतिरिक्त भंडारण जिसकी कुल कीमत 60 हज़ार रुपए है जिसे मौके पर ही ज़ब्त कर लिया गया। साथ ही जाँच में यह भी सामने आया कि पम्प पर पेट्रोल-डीज़ल प्रदाय मशीनों की संख्या विस्फोटक अनुज्ञप्ति (लाइसेंस) के अनुसार नहीं है । मौके पर एक मशीन कम पाई गई । 

पानी की जांच और अन्य सुविधाओं का निरीक्षण

टीम द्वारा पेट्रोल-डीज़ल में पानी की जांच भी की गई। इसके अलावा उपभोक्ताओं की सुविधाओं से संबंधित व्यवस्थाएं जैसे पेयजल की उपलब्धता, फ्री हवा की सुविधा आदि का भी निरीक्षण किया गया। टीम ने पम्प प्रबंधन को बिना हेलमेट के पेट्रोल न देने की अनिवार्यता की जानकारी भी दी ।

टीम में शामिल अधिकारी

कार्रवाई के दौरान खाद्य विभाग की टीम में सहायक आपूर्ति अधिकारी संदीप भार्गव, हुमा हुजूर, कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी सुनील वर्मा, वसुंधरा पेंड्रो, तृणाल जांभोलकर, तथा नापतौल निरीक्षक जैन शामिल रहे। जांच के समय पम्प के प्रोपराइटर का पुत्र आमिर ख़ान मौके पर मौजूद था।


पत्रकारों पर दबाव और फर्जी प्रचार का खुलासा

मामले की शुरुआत में शिकायतकर्ता ने अपना वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया । इस वीडियो के आधार पर कई पत्रकारों ने खबर प्रकाशित की इसके बाद पत्रकारों को राजधानी के रसूखदारों की ओर से फोन आने लगे और खबर रोकने तथा वीडियो डिलीट करने का दबाव बनाया गया। इतना ही नहीं, पम्प प्रबंधन की ओर से भोपाल के एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर को 1500 रुपये का भुगतान कर उसके पेज पर वीडियो डलवाया गया, जिसमें खबर को फर्जी बताया गया। इन्फ्लुएंसर ने खुद इस बात की पुष्टि की है ।

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